शाम को जल्दी से घर का काम करके सास पति और राज को साथ लेकर कमरे में चली जाती और मैं नौकर के साथ ससुर के कमरे में चली जाती। ससुर भी मेरे इंतज़ार में रहते और अपने कपड़े खोलकर रखते। मैं भी जाते ही ससुर के साथ चिपककर सो जाती। ससुर का तो इतना खड़ा नहीं होता था के वो मुझसे कर सके। इस कारण में नौकर को अपने साथ सुलाने लगी। नौकर हमारे साथ ही रजाई में सो जाता था और मैं उन दोनों के बीच में सो जाती। मैं ससुर की तरफ करवट लेकर सोई रहती तो नौकर पीछे से मेरी गाँड में डालकर करने लगता और कभी मेरी चूत में करता। फिर कई बार तो वो मुझे घोड़ी बनाकर करता तो पूरा बेड हिलने लग जाता था। तब ससुर पूछते तो मैं कह देती के मैं ही हिला रही हूँ।
फिर ससुर के साथ मम्मी सोने लगी। मम्मी के साथ कभी राज सो जाते या कभी पति और नौकर में से कोई सो जाता। फिर सास भी ससुर के साथ नंगी ही सोती और साथ में जो कोई सोता उससे करती रहती। सुबह में चाय देने ससुर के कमरे में गई तो मैंने देखा के नौकर ने सास को ससुर के ऊपर घोड़ी बना रखा हैं। नीचे से ससुर सास के बूब चूस रहे थे। ये देख कर मुझे हँसी आ गई। फिर नौकर झड़ गया तो सास ससुर के पास ही में बैठकर चाय पीने लगी। नौकर भी वहीं सास के पास ही बैठा था। सास दोनों के बीच में नंगी बैठी थी और फिर सास नौकर का लंड सहलाने लगी। सास अब बिल्कुल खुल चुकी थी।
फिर पति तो वापिस चले गए और हम ऐसे ही मस्ती करते रहे। मैं पीछे काम करने जाती तो नौकर पहले मुझसे करता फिर हम काम करते। सास जाती तो वो सास से भी करता। राज कभी मुझे या सास को खेत में ले जाते और फिर वहाँ हमसे करते। घर पर मैं रहती या सास तो नौकर दिनभर ही हमसे करता रहता। हम बस चुदाई ही चुदाई में लगे रहते। नौकर तो दिन में कई बार मेरी चूत का पानी पीता था। कुछ मैंने खानेपीने का ध्यान रखना भी छोड़ दिया था तो मैं काफी पतली हो गई। सास भी अब पहले जैसी मोटी नहीं रही थी। राज और नौकर तो काम करते और भैंस का दूध पीते थे तो उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा था।
ससुर का भी कोई डर नहीं था तो हम ससुर के सामने भी कर लेते थे। ससुर को चश्मा बगैर कुछ दिखता नहीं था तो हम उनकी चश्मा उतार लेते फिर उनके सामने चाहे जैसे घूमो। सर्दी के दिन थे तो धूप कम ही निकलती थी और जिस दिन निकलती उस दिन हम सब आँगन में नंगे होकर सो जाते थे। फिर मैंने राज और नौकर से मेरी और सास की ऑइल मसाज करने के लिए कहा। फिर मैं ऑइल गर्म करके लेके आई। फिर ऑइल लेकर राज और नौकर मेरी और सास की बॉडी पर लगाने लगे। वो मेरे और सास के अंग अंग पर ऑइल से मसाज करते। ऑइल से हमारी बॉडी बिल्कुल चिकनी हो जाती और धूप में चमकने लग जाती थी।
फिर हम गर्म हो जाते तो हम चुदाई करना शुरू कर देते। फिर तो बस हर दिन का यही रूटीन बन गया था। वो सुबह हमारी मसाज करना शुरू करते और शाम तक करते ही रहते। फिर मैं और सास शाम को ही नहाती। हमें इसमें काफी मजा आने आता था। लगातार ऑइल मसाज के कारण हमारी बॉडी काफी मुलायम हो गई थी। राज और नौकर काफी जोर से मालिश करते तो शरीर के छोटे छोटे बाल भी हट गए थे।
फिर एक रात मैं और नौकर ससुर के साथ सोये थे। सास राज के साथ अंदर सोई थी। फिर नौकर ने मुझसे किया और फिर मैं नौकर से चिपककर ससुर के साथ ही सो गई। फिर सुबह जब सास हमारे लिए चाय लेकर आई और फिर सास ने हमें जगाया। मैं और नौकर उठकर बैठ गए। फिर मैंने ससुर को जगाया तो ससुर कुछ नहीं बोले। फिर मैंने उन्हें एक दो बार और आवाज देकर जगाया लेकिन वो कुछ नहीं बोले तो फिर मैंने उनके शरीर के हाथ लगाया तो उनका शरीर एक ठंडा पड़ा था फिर मैं उनकी नब्ज चेक करने लगी। इतने में सास भी हमारे पास आ गई।
उनकी नब्ज भी नहीं चल रही थी। फिर मैंने उनकी धड़कन सुनी पर उनकी धड़कन भी नहीं चल रही थी। फिर मैंने सास की तरफ देखा और उन्हें आँखों के इशारों से बता दिया के अब ससुर नहीं रहे। ये सुनकर सास ससुर को हिलाने लगी। फिर मैंने नौकर से राज को बुलाकर लाने को कहा। मैं उठी और सास के पीछे आकर खड़ी हो गई और उन्हें उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया। सास रोने लगी थी। इतने में राज भी आ गए तो उन्होंने पहले ससुर को देखा और फिर सास के साथ बैठ गए। फिर मैंने राज से कहा के चलिए हम अंदर चलते हैं और कपड़े पहनकर आते हैं। फिर मैंने सास को उठाया और उन्हें अंदर ले जाने लगी। सास अभी भी रो रही थी। फिर मैंने सबके कपड़े निकाले और सबको दे दिए। मैंने पहले सास को कपड़े पहनाए और फिर खुद पहने। फिर सास ने राज से बोला के वो गाँव मे बता दे के अब ससुर नहीं रहे।
फिर राज चले गए और सास वहीं आँगन में बैठकर रोने लगी जोर जोर से। मैं उनके साथ वहीं बैठ गई। फिर कुछ देर में ही गाँव के लोग आ गए और राज भी आ गए। पति को भी सूचना देने के लिए ख़त वगेरह भेज दिया था। फिर ससुर का अंतिम संस्कार कर दिया। फिर धीरे धीरे सब लोग अपने अपने घर चले गए। घर पर सिर्फ हम ही रह गए थे। कोई रिश्तेदार वगेरह नहीं आया था तब तक। फिर रात हो गई तो मैंने खाना बनाया और फिर हमने खाना खाया और फिर सो गए। उस रात तो कुछ नहीं हुआ। फिर अगले दिन लोग सुबह से ही आना शुरू हो गए थे। जो कोई भी आता तो सास रोना शुरू कर देती फिर सब उन्हें ढांढस बंधाती । फिर राज तो ससुर की अस्थियाँ लेकर हरिद्वार चले गए और पति 2-3 दिन बाद आने वाले थे। फिर सब काम मैंने और नौकर ने संभाला। पहले मोबाइल वगैरह तो होते नहीं थे तो सबको धीरे धीरे ही मालूम पड़ रहा था। गाँव के सब लोग तो आ गए थे लगभग। फिर तो कम ही लोग आते थे।
फिर मैं काम करने पीछे की तरफ गई। फिर नौकर मुझे कहीं नहीं दिखा तो मैं उसके कमरे में गई तो देखा के नौकर नंगा ही सोया था और अपना लंड हिला रहा था। उसे देखकर मैं भी गर्म हो गई। फिर मैं कमरे के अंदर गई और गेट अंदर से बंद कर लिया। फिर मैंने जल्दी से अपने सब कपड़े खोल दिए और नंगी होकर नौकर के पास चली गई। नौकर मेरे बूब दबाने लगा और मैं भी नौकर की बॉडी सहलाने लगी। फिर मैं उसके सामने अपनी चूत खोलकर सो गई तो नौंकर ने भी अपना लंड जल्दी से डाल दिया और करने लगा। फिर मैं घोड़ी बन गई तो नौकर मेरी गाँड में करने लगा और फिर गाँड में ही झड़ गया। उसके झड़ते ही मैंने जल्दी से कपड़े पहने और उसके कमरे से बाहर आ गई और फिर पशुओं का दूध निकालने लगी। कुछ देर बाद नौकर भी बाहर आ गया और पशुओं को चारा डालने लगा। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराए और फिर नौकर मेरे पास आकर ही खड़ा हो गया और फिर हम ऐसे ही बातें करने लगे।
अगले भाग में बताऊंगी के सास ने ससुर के मरने के बाद दूसरे दिन ही चुदाई कैसे करवाई.....

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