सास की गाँड से पानी चाटने के बाद आँगन में ही चारपाई पर बैठे थे। फिर मैं वो सब ब्रा पेंटी और ज्वैलरी वगैरह बाहर ले आई। फिर मैंने सास से ब्रा पेंटी पहनने को कहा। तो सास ने एक लाल रंग की ब्रा पेंटी पहन ली। उसमे वो काफी सेक्सी लग रही थी। फिर उन्होंने कुछ और पहनी। फिर मैंने उन्हें एक नेकलेस पहनाया और कानों में उनकी पुरानी बाली निकालकर नई बाली पहनाई और उनके बाल खुले छोड़ दिये। फिर पति ने उन्हें आँगन में इधर उधर चलने को कहा तो उन्होंने आँगन में एक दो राउंड लगाए हम तीनों उन्हें देखते ही रह गए। वो तब काफी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। फिर पति मुझसे और सास से बोले के तुम दोनों रात को इसी तरह तैयार होना। फिर पति ने मुझसे और राज से हमारी सुहागरात के बारे में पूछा तो मैंने बताया के हमने तो दिन में ही सुहाग रात मना ली थी। फिर मैं और राज हँसने लगे। फिर पति बोले के कोई बात नहीं आज तुम दोनों सुहागरात मना लेना अच्छे से। फिर मैं बोली के और आप सास के साथ मना लेना। फिर हमने सास से उनकी सुहागरात के बारे में पूछा तो वो बोली के तुम्हारे ससुर ने एक बार ही किया और फिर हम सो गए। फिर पति बोले के आज मैं सारी रात करूँगा। फिर सास और पति एक दूसरे के तरफ देखकर मुस्कुराने लगे।
फिर सास मुझसे बोली के जल्दी से घर का काम कर लेते हैं फिर हमें तैयार भी तो होना हैं। फिर सास खाना वगेरह बनाने लगी और मैं पशुओ की तरफ चली गई। मेरे जाते ही वो नौकर मुझे देखकर अपना लंड निकालकर सहलाने लग जाता था। मैं कई बार उसका लंड सहला देती थी और वो कई बार मुझे पीछे से पकड़ लेता और मेरे बूब दबाने लग जाता। मैं उसे कुछ नहीं कहती थी। फिर उस दिन मैं काम कर रही थी और वहाँ पति और राज आ गए। मैं भैंस का दूध निकाल रही थी और वो नौकर मेरे सामने खड़ा होकर अपना लंड सहला रहा था वो नीचे से नंगा था। फिर पीछे से पति और राज आकर खड़े हो गए। फिर मैं नौकर से वैसे ही बातें करती रही। फिर मैंने दूध निकालकर बाल्टी तो साइड में रख दी और नौकर के पास आने लगी तो नौकर ने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और मेरी गाँड दबाने लगा। फिर वो पीछे की तरफ घुमा तो पति और राज को देखकर मुझे छोड़ दिया। फिर मैं जोर जोर से हँसने लगी। बेचारा नौकर घबरा गया था। पति और राज दोनों नंगे ही थे। नौकर को कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं पति और राज के बीच में आकर खड़ी हो गई और दोनों के लंड पकड़कर सहलाने लगी। नौकर हमें देखे जा रहा था। फिर मैं नौकर के पास गई और नौकर को बाँहों में भर लिया पर नौकर कुछ नहीं कर रहा था। फिर पति ने नौकर से गुस्से में मेरी गाँड दबाने को कहा तो नौकर बुरी तरह डर गया और मेरी गाँड दबाने लगा। फिर मैंने उसके हाथ मेरे बूब पर रख दिये तो वो मेरे बूब दबाने लगा। पति और राज दोनों मुझे देख रहे थे तो उन्हें दिखाने के लिए मैं नौकर से कुछ ज्यादा ही चिपक रही थी।
फिर पति मुझे देखकर बोले के तुम्हें तो काफी कुछ आता हैं। फिर मैं उनकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। फिर मैं पति और राज अंदर आ गए। मैं फिर घर के काम करने लग गई और पति और राज नहाकर बाहर जाकर बैठ गए। अंधेरा हो गया था और लाइट भी नही थी। फिर इसी बात का फायदा उठाकर पति राज और ससुर को वहीं खाना परोस दिया। वो चौकी पर बैठे थे। ससुर की दोनों आँखों में मोतियाबिंद था तो उन्हें धुंधला ही दिखता था सब। मैं और सास ने उन्हें नंगी रहकर ही खाना खिला रही थी। हम खाना खिला रही थी तभी लाइट आ गई और बल्ब जल गया एक दम से। मैं खाना परोस रही थी। लेकिन सास तो ससुर के सामने ही बैठी थी। ससुर के तब चश्मा नहीं लगा था तो उन्हें कुछ खास दिख नहीं रहा था। फिर मैं भी ससुर के सामने नंगी घूमने लगी। राज और पति ने भी अपनी लूँगी खोल दी थी और वो नंगे ही बैठे थे। फिर खाना खाकर पति और राज बाहर ही लेटे रहे हैं। मैंने उन्हें कहा के हम तैयार हो जाएंगी तब आप दोनों को बुला लेंगी।
फिर मैं और सास अंदर गई और कमरे में से बेड निकालकर आँगन में लगा दिया। फिर हमने एक एक ब्रा पेंटी पहनी और गले में, हाथ में और कमर वगेरह पर ज्वैलरी वगेरह पहनी। पैरों में पायजेब भी पहनी थी। मेकअप का सामान भी था तो हम दोनों ने मेकअप वगेरह करके तैयार हो गई। पैरों में पहनने के लिए पति हाई हील सैंडल भी लाये थे पहले। तो वो भी पहन लिए। फिर मैंने सास से पति और राज जो बुलाकर लाने को कहा। तो मम्मी बाहर चौकी पर जाने लगी। मैंने पीछे से सास को देखा तो वो काफी सेक्सी लग रही थी। फिर मैं कमरे से बाहर बेड पर बैठ गई। इतने में सास, पति और राज भी आ गए। सास पति और राज के बीच में चल रही थी और दोनों ने सास की कमर में हाथ डाल रखा था। फिर राज मेरी तरफ आ गए और पति सास के साथ बेड पर बैठ गए। फिर दोनों हमारी बॉडी से खेलने लगे और धीरे धीरे करके हमारी ब्रा पेंटी भी खोल दी। फिर दोनों हमें घोड़ी बनाकर करने लगे। राज तो कभी मेरी गाँड मारने लगता कभी चूत पर पति सास की चूत में ही कर रहे थे। फिर हम झड़ गए तो हम लेटकर आराम करने लगे। फिर सास ने मुझसे पूछा के तुम दोनों से एक साथ कैसे करती हो। फिर मैंने पति और राज से करने को कहा। मैं राज के पास लेटी थी तो राज ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया फिर पति खड़े होकर आए और वो मेरी गाँड में करने लगे। सास हमे देखती ही रह गई। फिर पति वापिस सास के पास चले गए और सास को घोड़ी बनाकर उनकी गाँड में डालने लगे। पर गाँड में नहीं जा रहा था। सास ने पहले कभी गाँड में नहीं करवाया था। फिर मैंने पति के लंड मुँह में लेकर उस पर काफी सारा थूक लगाया। फिर पति ने वापिस डाला तो आगे से थोड़ा सा अंदर चला गया और सास को दर्द होने लगा तो वो बाहर निकालने के लिए बोलने लगी। पर पति ने एक जोरदार धक्का और लगाया और लंड आधा अंदर चला गया और सास जोर जोर से चीखने लगी। पति ने सास के दोनों हाथ पकड़ रखे थे तो सास छुटाने की कोशिश कर रही थी पर पति ने उन्हें मजबूती से पकड़ रखा था।
फिर पति ने जोर से धक्का लगाकर लंड पूरा अंदर डाल दिया। सास जितनी जोर से चीख सकती थी चीखी और उनकी आँखों मे भी पानी आ गया था। फिर पति करने लगे। सास का दर्द कम हुआ तो फिर वो भी साथ देने लगी। फिर पति झड़ गए तो वो साइड हो गए। फिर मैं उठी और सास की गाँड चूसने लगी। सास को जोर लगाने को कहा तो पति का सारा पानी बाहर आ गया और वो मैंने पी लिया। फिर राज भी सास के पास आये। सास तब उल्टी लेटी हुई थी तो राज ने सास के पैर खोल दिये पूरे और फिर अपना लंड उनकी गाँड में डालकर करने लगे। पति पास में बैठे सास की पीठ पर हाथ फिरा रहे थे। फिर राज भी सास की गाँड में ही झड़ गए। फिर मैं बोली के अब इन्हें आराम करने दो। फिर राज और पति मेरे साथ आकर लेट गए। मैं उनके बीच में सोई थी और वो मुझसे चिपक कर सोये थे। सास वैसे ही उल्टी ही सो गई थी। फिर सुबह मैं उठी उससे पहले सास उठ चुकी थी। फिर मैं खड़ी हुई तो देखा के सास बाहर वाले कमरे से आ रही थी और थोड़ी लंगड़ाकर चल रही थी। फिर मैं सास के पास गई और उनकी बॉडी को छुआ तो उनकी बॉडी गर्म थी। फिर मैंने सास से कहा के आपको तो बुखार हैं। फिर सास बोली के हाँ दर्द के कारण थोड़ा बुखार हो गया हैं टेबलेट लेकर आई हूँ ठीक हो जाएगा। फिर मैं सास को चूल्हे के पास ले गई और वहाँ सास को बैठाने लगी तो सास बोली बैठा नहीं जाएगा फिर वो नीचे ही फर्श पर ही लेट गए। फर्श साफ ही था तो वो वहाँ सो गई फिर मैं चाय बनाने लगी।
चाय बन रही थी तब मैं सास से बोली के मैं आपकी गाँड को थोड़ा शेक कर देती हूँ फिर ज्यादा दर्द नहीं करेगी। फिर मैंने एक कपड़ा लिया और उसे थोड़ा बॉल की तरफ गोल करके आग के सामने किया फिर वो थोड़ा गर्म हो गया तो फिर उसे सास की गाँड पर रख दिया। फिर सास बोली के इससे काफी आराम मिल रहा हैं। फिर मैंने कई बार किया। फिर सास उठकर बैठ गई उन्हें अब दर्द नहीं हो रहा था। फिर चाय बन गई तो मैंने चाय सास को दे दी। फिर ससुर को भी चाय देनी थी। पर सास तो चलने की हालत में नहीं थी और पति और राज उठे नहीं थे। फिर सास मुझसे बोली के तू दे आ उन्हें चाय। फिर मैं बोली के मैं सूट पहन लेती हूँ। फिर सास बोली के इतनी सी देर के लिए क्या सूट पहनोगी ऐसे ही चली जाओ। फिर मैं नंगी ही चाय लेकर चल पड़ी। ससुर तब चौकी पर चारपाई पर थे। मैं उनके पास गई तो मेरी पायजेब की आवाज सुनकर वो समझ गए के मैं चाय देने आई हूँ। फिर उन्होंने चाय पास रखे टेबल पर रखने को कहा तो मैंने रख दी। वो तब सीधे सोये थे। हार्दिक भी वहीं दूसरी चारपाई पर सोया था। फिर मैं पहले तो वहीं खड़ी रही और फिर मैं हार्दिक के पास गई और उसे उठाने लगी। ससुर ने एक बार तो मेरी तरफ देखा और फिर दूसरी तरफ मुँह घुमा लिया। फिर मैं हार्दिक को गोद में उठाया और अंदर आ गई। फिर मैंने हार्दिक का मुँह धुलवाया और फिर उसे चूल्हें के पास ले गई। फिर मैंने हार्दिक को सास को दे दिया तो फिर सास उसे दूध पिलाने लगी अपनी गोद में बैठाकर। फिर मैं घर के काम में लग गई। सास फिर हार्दिक को लेकर बाहर चौकी पर चली गई।
फिर मैं झाड़ू लगाने लगी। पहले अंदर झाड़ू लगाई और फिर बाहर वाले कमरे में झाड़ू लगाने लगी। कमरे की झाड़ू लगाकर फिर मैं चौकी पर चली गई। चौकी पर सास नंगी ही हार्दिक के साथ सोई थी और हार्दिक सास के बूब के साथ खेल रहा था। ससुर करवट लेकर सोये थे। फिर मैं चौकी पर झाड़ू लगाने लगी। फिर मैं ससुर की चारपाई के पास झाड़ू लगा रही थी तो मैं थोड़ी झुकी हुई थी और ससुर का मुँह मेरी गाँड की तरफ ही था। फिर मैं उनके सामने ही बिना डर और शर्म के झाड़ू लगाने लगी और सारा कचरा चौकी से नीचे डाल दिया। फिर मैंने चौकी से नीचे उतरकर भी कुछ दूर तक झाड़ू लगा दी। ऐसे नंगी होकर काम करने में काफी मजा आ रहा था। फिर मैं पीछे पशुओं की तरफ चली गई दूध वगैरह निकालने। नौकर पशुओं को अभी तक चारा वगैरह ही डाल रहा था। मैं तब तक लैट्रिन नहीं गई थी तो मुझे लैट्रिन आने लगी तो मैं वहाँ बनी टॉयलेट में चली गई। मैं टॉयलेट में थी तब नौकर भी नंगा होकर वहाँ आ गया और मुझे देखकर अपना लंड सहलाने लगा। फिर वो वहीं नीचे बैठ गया तो मैंने उसका लंड हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। फिर मैंने लैट्रिन कर ली तो वहाँ पानी नहीं था फिर मैंने नौकर से पानी लाने को कहा तो वो बोला के बाहर ही धो लेना। फिर मैं और वो दोनों टॉयलेट से बाहर आये और वहाँ पशुओं को पानी पिलाने के लिए एक होदी बनी थी। फिर मैं उसके पास चली गई नौकर भी मेरे पीछे पीछे आ गया। फिर मेरे मन में नौकर से गाँड धुलवाने का विचार आया। फिर मैं होदी की तरफ थोड़ी झुककर अपनी गाँड निकालकर खड़ी हो गई और नौकर से गाँड धोने को कहा। तो वो मुस्कुराता हुआ मेरे पास आया और होदी से पानी लेकर गाँड धोने लगा। गाँड धोते टाइम वो अपनी अंगुली कभी मेरी गाँड में डाल देता कभी चूत में। उससे गाँड धुलवाकर मैं चल पड़ी तो वो भी मेरे साथ साथ चलने लगा और उसका हाथ मेरी गाँड पर ही घूम रहा था।
फिर मैंने पशुओं का दूध निकाला और अंदर चली गई। फिर मैंने चाय बनाई और पति और राज को उठाया। फिर हम सब साथ बैठकर चाय पीने लगे और मैंने उन्हें सास की हालत के बारे में बताया। तो वो दोनों हँसने लगे। फिर पति बोले के दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा उन्हें आज आज आराम करने दो। फिर राज बोले आज हम खेत चलते हैं। फिर पति बोले के ठीक है। राज ने मुझे जल्दी से घर का काम करने के लिए कहा।
अगले भाग में बताऊंगी के हमने खेत में क्या क्या रासलीला की.......
खेत मे रासलीला


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