मैं भाई का लंड सहलाती हुई सबकी तरफ देख रही थी और बिना किसी शर्म के खड़ी थी और मुस्कुरा रही थी। फिर भाई मुझे यपर ले जाने लगा और बाकी सब मर्द हमारे पीछे पीछे आने लगे। मैं भाई के साथ मस्ती से चल रही थी। चलते समय मेरे बोबे और गाँड रहे थे। जो देखकर वो सब काफि गर्म हो रहे थे। फिर हम ऊपर पहुँच गए। वहाँ एक हाल था जिसमें के वो सब रहते थे। वहाँ पहुंचकर भाई मेरे पीछे खड़ा हो गया और उनके सामने मेरे बोबे दबाने लगा और मेरी पूरी बॉडी सहलाने लगा। वो सब बोल रहे थे के क्या मस्त लड़की हैं। फिर भाई मुझे लेकर उन सबके बीच चला गया। फिर उनमें से कुछ मुझे घेरकर खड़े हो गए और वो भी मेरे बदन को सहलाने लगे। फिर भाई मुझे छोड़कर दूर खड़ा हो गया और अपना लंड सहलाने लगा और वो सब मर्द मुझे सहलाने लगे। मैं भी उन सबके लंड पकड़कर सहलाने लगी। फिर कोई मुझे अपनी बांहों में भरता तो कोई पीछे से अपना लंड मेरी गाँड में रगड़ता। फिर ऐसे करते करते मैं घुटनो के बल बैठ गई और उनके लंड चुसने लगी और दोनों हाथों से दो जनों के लंड सहलाने लगी। फिर काफी देर ऐसे करने के बाद कोई तो मेरे मुँह में झड़ गया और कोई मेरे हाथ मे। उनमें से कई बस खड़े होकर हमे देख रहे थे।
फिर भाई मेरे पास आया और खुद नीचे लेट गया और फिर मुझे अपने खड़े लंड पर बैठा लिया और फिर मुझे आपने ऊपर घोड़ी बना लिया और पीछे से मेरी गाँड खोल दी। मेरी गाँड का खुला हुआ छेद देखकर एक आदमी मेरे पीछे आया और मेरी गाँड में लंड डालकर करने लगा। फिर वो बस कुछ देर में ही झड़ गया। फिर दूसरा, फिर तीसरा इस तरह जो झड़े बिना रह गए थे वो सब झड़ गए। फिर भाई भी मेरी चुत में ही झड़ गया और उसका पानी मेरी चुत में से भाई के लंड के साथ बाहर आने लगा। फिर भाई कुछ देर और करता रहा और फिर भाई ने मुझे अपने ऊपर से उतार दिया तो मैं वहीं पास में ही सीधी लेट गई। फिर मैं आराम करने लगी। लेकिन मुझे आराम कौन करने देता इतने मर्दों के बीच नंगी जो पड़ी थी। फिर एक आदमी आया और वो मेरी चुत में डालकर करने लगा। फिर दो तीन और आ गए और वो मेरे बोबे सहलाने लगे तो फिर मैं भी उनके लंड सहलाने लगी। फिर उन्होंने मुझे वापिस पहले जैसी पोजीशन में कर लिया और फिर नीचे से एक मेरी चुत मारने लगा और एक पीछे से गाँड और एक जने का मैं मुँह में लेकर चुसने लगी और दो जनों का हाथ मे लेकर। इस तरह मैं एक साथ पांच पांच मर्दों से कर रही थी। पर मेरे लिए ये सब नया नहीं था तो मैं उन सबको आराम से हैंडल कर रही थी।
फिर इसी तरह उन सबने ने मुझसे एक एक बार और कर लिया और फिर सब फिर से तैयार हो गए। उनमें से कुछ शर्म के मारे कपड़े पहने ही खड़े। मेरी चुदाई देखकर फिर वो भी गर्म होकर नंगे हो गए। फिर उन्होंने मुझे खड़ी कर लिया और फिर वो मेरा बदन सहलाने लगे और मैँ भी उनका लंड सहलाने लगी। फिर उनमें से कुछ मेरी चुत और गाँड चाटने लगे। फिर मुझे पेशाब आने लगा तो मैं कमरे से बाहर नंगी ही आई और वहीं बनी नाली पर बैठकर पेशाब करने लगी। मेरे पीछे पीछे कुछ आदमी भी आ गए। फिर मैं पेशाब करने लगी और मेरी गाँड से उनका पानी निकलने लगा। फिर मैं पेशाब करके खड़ी होकर अंदर जाने लगी तो वो सब मेरे से फिर से झूम गए। फिर वो सब मुझसे करने लगे। हमे करते करते दोपहर से भी ज्यादा टाइम हो गया था और भूख भी लग गई थी। फिर उनमें से कुछ खाना बनाने लगे और कुछ मेरी चुदाई ही करते रहे। फिर खाना खाते खाते भी दो तीन ने मेरी चुदाई कर दी। जब तक हर आदमी मुझे 2 से 3 बार चोद चुका था यानी के 40 से 50 बार मेरी चुदाई हो चुकी थी। लेकिन मुझे तब भी इतनी ज्यादा थकान वगेरह महसूस नहीं हो रही थी। क्योंकि मैं इससे पहले भी दिन दिन भर चुदवा चुकी थी। फिर शाम तक भी यही प्रोग्राम चलता रहा।
फिर शाम को जब लगभग सभी का मन भर गया तो फिर हम सब कमरे से बाहर बने बरामदे में आ गए। हम सब नंगे ही थे और मै उन सबके बीच नंगी ही इधर उधर घूमने लगी। फिर कोई मुझे अपनी बाहों में लेता तो कोई कुछ करता तो कोई कुछ। फिर शाम हो गई तो उन सबने फिर से मेरी चुदाई शुरू कर दी। फिर उन्होंने एक एक दो दो बार किया और फिर मैं तक चुकी थी तो फिर उन सबने मुझपे रहम दिखाया और मुझे आराम करने दिया। फिर मैं सो गई और मुझे नींद आ गई। फिर बाकी सब भी सो गए। फिर अगले दिन सुबह मैं जल्दी ही उठ गई। सुबह उठी तो देखा के सब सोए थे। वो सब नंगे ही थे। किसी का लंड खड़ा था तो किसी का बैठा था। फिर भाई ने मुझे चाय और नाश्ता लाकर दिया और फिर इतने में वो सब भी जाग चुके थे। फिर हम सब कमरे से बाहर आ गए। फिर मैं बाहर ही मुंडेर के सहारे झुककर खड़ी हो गई तो फिर वो एक एक करके आकर मेरी गाँड मारने लगे। फिर सबने गाँड मार ली तो फिर भाई मुझे अपनी गोद मे उठाकर नीचे ले गया। वहाँ हमारे अलावा कोई और नहीं रहता था तब तक और जो रहता था वो मुझे चोद चुका था। फिर मैं फ्रेश हुई और नहाई। जब नहाई तो बाथरूम का गेट खुला ही था और वो सब बाहर खड़े खड़े मुझे देख रहे थे। फिर मैं नहाकर ऊपर आ गई तो फिर वो सब भी आ गई और चुदाई फिर से शुरू हो गई।
ऐसे रोज रोज चुदाई मैं भी नहीं करवा सकती थी तो फिर भाई ने उन सबसे कह दिया के दोपहर बाद हम जाने वाले हैं। फिर दोपहर तक उन्होंने मेरी जमकर चुदाई की। उनमें कुछ बूढ़े भी थे उन्होंने भी मेरी जमकर ली। फिर उन सबने कर लिया तो फिर मैं और भाई हमारे कमरे में आये और कपड़े पहने और जाने लगे। जाने से पहले मैंने उनको फ्लाई किस दिया। फिर वो सब हँसने लगे और हम वहाँ से चले गए और वहाँ से थोड़ी दूर कोई दूसरा कमरा ले लिया और फिर वहाँ रहने लगे। मेरी चुत काफी सूज गई थी। फिर हम कुछ दिन वहाँ रूके। फिर भाई भी बोला के मजा आ गया। फिर मैं बोली के ऐसे मजे गाँव मे बहुत हैं। फिर वो बोला के वो तो हैं पर वो यहाँ शहर में रहकर ही काम करना चाहता हैं। फिर मैं बोली के ठीक हैं। हम एक बार गांव चलते हैं वहाँ तेरे जीजा की भुआ की दो बेटियां। उनमें से जो भी तुझे पसंद हो तू उससे शादी कर लेना और फिर वापिस यहाँ आ जाना। फिर भाई मान गया तो भाई ने हमारे आने का खत लिखकर पापा के पास भेज दिया। फिर इसके कुछ दिन बाद हम गाँव चले गए।
गांव आने के बाद क्या क्या हुआ ये अगले भाग में बताऊँगी...
फिर भाई मेरे पास आया और खुद नीचे लेट गया और फिर मुझे अपने खड़े लंड पर बैठा लिया और फिर मुझे आपने ऊपर घोड़ी बना लिया और पीछे से मेरी गाँड खोल दी। मेरी गाँड का खुला हुआ छेद देखकर एक आदमी मेरे पीछे आया और मेरी गाँड में लंड डालकर करने लगा। फिर वो बस कुछ देर में ही झड़ गया। फिर दूसरा, फिर तीसरा इस तरह जो झड़े बिना रह गए थे वो सब झड़ गए। फिर भाई भी मेरी चुत में ही झड़ गया और उसका पानी मेरी चुत में से भाई के लंड के साथ बाहर आने लगा। फिर भाई कुछ देर और करता रहा और फिर भाई ने मुझे अपने ऊपर से उतार दिया तो मैं वहीं पास में ही सीधी लेट गई। फिर मैं आराम करने लगी। लेकिन मुझे आराम कौन करने देता इतने मर्दों के बीच नंगी जो पड़ी थी। फिर एक आदमी आया और वो मेरी चुत में डालकर करने लगा। फिर दो तीन और आ गए और वो मेरे बोबे सहलाने लगे तो फिर मैं भी उनके लंड सहलाने लगी। फिर उन्होंने मुझे वापिस पहले जैसी पोजीशन में कर लिया और फिर नीचे से एक मेरी चुत मारने लगा और एक पीछे से गाँड और एक जने का मैं मुँह में लेकर चुसने लगी और दो जनों का हाथ मे लेकर। इस तरह मैं एक साथ पांच पांच मर्दों से कर रही थी। पर मेरे लिए ये सब नया नहीं था तो मैं उन सबको आराम से हैंडल कर रही थी।
फिर इसी तरह उन सबने ने मुझसे एक एक बार और कर लिया और फिर सब फिर से तैयार हो गए। उनमें से कुछ शर्म के मारे कपड़े पहने ही खड़े। मेरी चुदाई देखकर फिर वो भी गर्म होकर नंगे हो गए। फिर उन्होंने मुझे खड़ी कर लिया और फिर वो मेरा बदन सहलाने लगे और मैँ भी उनका लंड सहलाने लगी। फिर उनमें से कुछ मेरी चुत और गाँड चाटने लगे। फिर मुझे पेशाब आने लगा तो मैं कमरे से बाहर नंगी ही आई और वहीं बनी नाली पर बैठकर पेशाब करने लगी। मेरे पीछे पीछे कुछ आदमी भी आ गए। फिर मैं पेशाब करने लगी और मेरी गाँड से उनका पानी निकलने लगा। फिर मैं पेशाब करके खड़ी होकर अंदर जाने लगी तो वो सब मेरे से फिर से झूम गए। फिर वो सब मुझसे करने लगे। हमे करते करते दोपहर से भी ज्यादा टाइम हो गया था और भूख भी लग गई थी। फिर उनमें से कुछ खाना बनाने लगे और कुछ मेरी चुदाई ही करते रहे। फिर खाना खाते खाते भी दो तीन ने मेरी चुदाई कर दी। जब तक हर आदमी मुझे 2 से 3 बार चोद चुका था यानी के 40 से 50 बार मेरी चुदाई हो चुकी थी। लेकिन मुझे तब भी इतनी ज्यादा थकान वगेरह महसूस नहीं हो रही थी। क्योंकि मैं इससे पहले भी दिन दिन भर चुदवा चुकी थी। फिर शाम तक भी यही प्रोग्राम चलता रहा।
फिर शाम को जब लगभग सभी का मन भर गया तो फिर हम सब कमरे से बाहर बने बरामदे में आ गए। हम सब नंगे ही थे और मै उन सबके बीच नंगी ही इधर उधर घूमने लगी। फिर कोई मुझे अपनी बाहों में लेता तो कोई कुछ करता तो कोई कुछ। फिर शाम हो गई तो उन सबने फिर से मेरी चुदाई शुरू कर दी। फिर उन्होंने एक एक दो दो बार किया और फिर मैं तक चुकी थी तो फिर उन सबने मुझपे रहम दिखाया और मुझे आराम करने दिया। फिर मैं सो गई और मुझे नींद आ गई। फिर बाकी सब भी सो गए। फिर अगले दिन सुबह मैं जल्दी ही उठ गई। सुबह उठी तो देखा के सब सोए थे। वो सब नंगे ही थे। किसी का लंड खड़ा था तो किसी का बैठा था। फिर भाई ने मुझे चाय और नाश्ता लाकर दिया और फिर इतने में वो सब भी जाग चुके थे। फिर हम सब कमरे से बाहर आ गए। फिर मैं बाहर ही मुंडेर के सहारे झुककर खड़ी हो गई तो फिर वो एक एक करके आकर मेरी गाँड मारने लगे। फिर सबने गाँड मार ली तो फिर भाई मुझे अपनी गोद मे उठाकर नीचे ले गया। वहाँ हमारे अलावा कोई और नहीं रहता था तब तक और जो रहता था वो मुझे चोद चुका था। फिर मैं फ्रेश हुई और नहाई। जब नहाई तो बाथरूम का गेट खुला ही था और वो सब बाहर खड़े खड़े मुझे देख रहे थे। फिर मैं नहाकर ऊपर आ गई तो फिर वो सब भी आ गई और चुदाई फिर से शुरू हो गई।
ऐसे रोज रोज चुदाई मैं भी नहीं करवा सकती थी तो फिर भाई ने उन सबसे कह दिया के दोपहर बाद हम जाने वाले हैं। फिर दोपहर तक उन्होंने मेरी जमकर चुदाई की। उनमें कुछ बूढ़े भी थे उन्होंने भी मेरी जमकर ली। फिर उन सबने कर लिया तो फिर मैं और भाई हमारे कमरे में आये और कपड़े पहने और जाने लगे। जाने से पहले मैंने उनको फ्लाई किस दिया। फिर वो सब हँसने लगे और हम वहाँ से चले गए और वहाँ से थोड़ी दूर कोई दूसरा कमरा ले लिया और फिर वहाँ रहने लगे। मेरी चुत काफी सूज गई थी। फिर हम कुछ दिन वहाँ रूके। फिर भाई भी बोला के मजा आ गया। फिर मैं बोली के ऐसे मजे गाँव मे बहुत हैं। फिर वो बोला के वो तो हैं पर वो यहाँ शहर में रहकर ही काम करना चाहता हैं। फिर मैं बोली के ठीक हैं। हम एक बार गांव चलते हैं वहाँ तेरे जीजा की भुआ की दो बेटियां। उनमें से जो भी तुझे पसंद हो तू उससे शादी कर लेना और फिर वापिस यहाँ आ जाना। फिर भाई मान गया तो भाई ने हमारे आने का खत लिखकर पापा के पास भेज दिया। फिर इसके कुछ दिन बाद हम गाँव चले गए।
गांव आने के बाद क्या क्या हुआ ये अगले भाग में बताऊँगी...
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