ससुर का हमने 12 दिनों का शोक रखा था। उस शोक में भी हम वैसे ही मस्ती करते रहे। पति ने सास से कहा के अब तुम अपने आपको कुंवारी लड़की की तरह ही समझो। अब तुम पर कोई बंधन नहीं हैं। फिर सास बोली के हाँ पहले तेरे पिताजी थे तब थोड़ा ऐसे लगता जैसे ये सब गलत हैं पर शारीरिक सुख के लिए मैं कर लेती थी। पर अब ऐसा कुछ नहीं लगता हैं।

अब सास काफी खुश खुश रहने लगी थी। कोई आता तब सास थोड़ा रोने का नाटक करती। फिर दिन ऐसे ही निकलते रहे। सुबह सुबह मैं, पति, राज और नौकर जल्दी उठते और घर का काम करते। क्योंकि फिर बाद में तो लोग आने लग जाते थे। फिर सास भी सुबह जल्दी उठकर घर का काम करवाने लगी। मैं बाहर वाले कमरे की और चौकी पर झाड़ू लगाने जाती तो हम सब वहीं इकट्ठे होते। तब अंधेरा ही होता था और थोड़ी थोड़ी ठंड भी पड़ती थी। फिर सास भी वहीं आ जाती थी उठकर। बाकी कुछ लोग आए थे वो तो सोये ही रहते थे तब तक। फिर हम बातें वगेरह करते और साथ मे काम करते रहते। मैं नौकर के साथ चौकी की और चौकी से नीचे झाड़ू लगाती। झाड़ू लगाते टाइम गर्मी लगने लग जाती और पसीना भी आ जाता था। फिर मैं ऊपर सिर्फ एक स्वेटर ही पहन लेती और गर्मी लगने लग जाती तब स्वेटर के आगे से बटन खोल देती और फिर झाड़ू लगाती। ऐसे मैं झुककर झाड़ू लगाती तो मेरे दोनों बूब बाहर लटकते रहते। इससे मुझे भी काफी सेक्सी फीलिंग आती और नौकर भी मुझे ऐसे देखकर गर्म हो जाता था। फिर मैं झाड़ू निकालते निकालते बाहर वाले गेट तक चली जाती और नौकर भी मेरे साथ ही होता। फिर हम फुल गर्म हो जाते तो मैं अपनी सलवार खोल देती और किसी चीज के सहारे झुककर खड़ी हो जाती और नौकर मेरी गाँड में डालकर करने लग जाता। फिर वो कर लेता तो मैं सलवार वापिस पहन लेती और फिर हम बाहर वाले कमरे में चले जाते।

पहले सास नहीं होती थी तो पति और राज मुझे कमरे में ही नंगी कर लेते और करने लग जाते थे। फिर सास आने लगी तो वो सास से करने लगे। सास नंगी होकर उनके साथ रजाई में सो जाती और फिर वो पति और राज से करती। फिर एक बार मैं झाड़ू लगाकर वापिस बाहर वाले कमरे की तरफ गई तो देखा के पति और राज सास के साथ नंगे ही बाहर खड़े हैं और वो सास से कर रहे हैं। फिर कई बार मैं भी नंगी होकर उनके साथ करने लग जाती। फिर नौकर सास से करता और मैं पति और राज से। फिर मैं और नौकर तो पीछे की तरफ चले जाते और सास पति और राज से करती रहती।

पीछे पशुओ की तरफ कोई नहीं होता था और मैं झाड़ू निकालकर आई होती तो मुझे गर्मी लग रही होती तो मैं नीचे से सलवार खोल देती और फिर ऐसे ही काम करती रहती। मैं सिर्फ स्वेटर में ही घूमती रहती और स्वेटर भी आगे से खुली होती और स्वेटर मेरी कमर तक ही आती तो मेरी गाँड ऐसे ही दिखती रहती। नौकर भी मुझे देख देखकर अपना लंड हिलाता रहता और जब उसे मौका मिलता तो मुझसे करने लग जाता। तब घर पर एक तो मेरे पति की भुआ आई थी जो कि बूढ़ी ही थी और दो उनकी लड़कियां थी जिनकी उम्र 18 के लगभग ही थी। वो लड़कियां मुझसे काफी घुल मिल गई थी और मैं भी उनका काफी ख्याल रखती। कई बार मैं उनके सामने ही नंगी होकर कपड़े बदल लेती थी। रात को वो दोनों मेरे पास ही सोती तो रात को मैं शार्ट ड्रेस में सो जाती थी। हम अलग कमरे में सोते थे।

फिर एक बार मैं दूध निकालकर पीछे की तरफ से आ रही थी। तब मैं सिर्फ स्वेटर में ही थी। मेरे दोनों हाथों में दूध की बाल्टी थी। इतने में वो दोनों मुझे ढूंढते हुए पीछे की तरफ आ गई। फिर मैं उन्हें ऐसे आती हुई दिखी तो वो मुझे देखती ही रह गई। फिर मैंने उनसे पूछा के क्या बात हैं। फिर वो बोली के हम तो आपके पास ही आ रही थी। फिर मैंने कहा के चलो अंदर चलते हैं। फिर वो दोनों भी मेरे साथ अंदर आ गई। मुझे उनके सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही थी। फिर मैं दूध रसोई में छोड़कर उनके साथ कमरे में चली गई। फिर वो बोली के आप ऐसे क्यों हो। तब मैंने उन्हें बताया के मुझे गर्मी काफी लगती हैं और पसीना आ जाता हैं। फिर पसीने से कपड़े भीग जाते हैं। फिर पसीने से भीगे हुए कपड़े मेरे शरीर से लगते हैं तो मेरा शरीर खराब हो जाता हैं। ये एक तरह की बीमारी हैं। वो दोनों मेरी बातें बहुत गौर से सुन रही थी। फिर वो बोली के इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हैं। फिर मैंने अपनी तरफ इशारा करके कहा के बस यही इलाज हैं। तुम दोनों इसके बारे में किसीको बताना मत। तो वो बोली के हम नहीं बताएंगी। मैं बोली के ठीक है अब चलो तुम चाय बनाओ और मेरा पीछे थोड़ा काम और रहा हैं मैं वो करके आती हूँ। वो बोली के ठीक है।

फिर वैसे ही नंगी पीछे चली गई। फिर वहाँ पति और राज भी थे तो मैंने उनको ये बात बताई तो फिर वो हँसने लगे। मुझे भी काफी हँसी आई। फिर मैं पति, राज और नौकर के साथ नौकर के कमरे में चली गई। फिर तीनो ने एक एक बार मुझसे किया। फिर मैं नंगी ही जाने लगी तो पति बोले के ये स्वेटर तो पहन लो। फिर मैं हँसते हुए बोली के जरूरत नहीं हैं। फिर मैं बिल्कुल नंगी ही अंदर जाने लगी। फिर उनमें से एक लड़की वहीं थी फिर वो मुझसे बोली के चाय बन गई हैं मैंने कहा के चलो। फिर मैं उसके साथ अंदर जाने लगी। मेरी चूत से पानी बह रहा था फिर उसने पूछा के ये क्या हैं। फिर मैं बोली के ये तो मुझे महीना आया हैं तब बह रहा हैं। फिर मैं कमरे में चली गई और वो दोनों भी वहीं बैठकर चाय पीने लगी और साथ में मुझे देखने लगी। फिर मैंने पहले एक कपड़े से अपनी चूत पोंछी और फिर कपड़े पहनने लगी। फिर मैंने चाय पी। चाय पीकर हम खाना वगैरह बनाने में लग गए।

फिर दिन में मुझे कभी भी टाइम मिलता तो मैं पीछे की और चली जाती और नौकर के कमरे में थोड़ा आराम कर लेती। कई बार नौकर आ जाता तो मैं उसके बिस्तर में ही सोई होती थी तो वो भी मेरे साथ आकर सो जाता और हम फिर नंगे होकर चुदाई करने लग जाते। मेरा और नौकर का मन तो कभी चुदाई से भरता ही नहीं था। फिर एक दिन मैं नौकर से कर रही थी तो वो लड़की मुझे ढूंढते ढूंढते पीछे की और आ गई। मैं और नौकर कर रहे थे तो हमारी आवाजें बाहर तक सुनाई दे रही थी। फिर उसने मुझे आवाज दी तो मैंने और नौकर ने करना बंद कर दिया और उसे कहा के आती हूँ। तब नौकर लंड मेरी चूत में था और वो झड़ा नहीं था तब तक। फिर वो मुझसे फिर करने लगा और झड़ गया। फिर मैं उठी और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगी। फिर कपड़े पहनकर मैंने कमरे का गेट खोला तो वो तब सामने ही खड़ी थी। फिर मैं अपने कपड़े सही करती हुई बाहर निकली और नौकर तब चारपाई के पास खड़ा खड़ा अपने कपड़े ही पहन रहा था। फिर मैं उसके साथ अंदर चली गई। जब हम अंदर जा रही थी तब मैंने अपनी कमर के हाथ लगाकर थोड़ी एक्टिंग की जैसे कि मेरी कमर दर्द कर रही हो। फिर उस लड़की ने पूछा के क्या हुआ तो मैंने बताया के मेरी कमर दर्द करती हैं। नौकर से दबवा लेती हूँ फिर कुछ आराम आता हैं। फिर उस लड़की को ऐसे लगा के मैं नौकर से कमर दबवा रही थी। फिर तो मैं कभी नौकर से करने जाती तो बस कमर दबवाने का बहाना बनाकर चली जाती।

मैं और वो दोनों लड़कियाँ लगभग साथ में ही नहाती। मैं या उन दोनों में से कोई पानी गर्म कर लेता और फिर एक एक करके हम नहा लेती। सास और पति की भुआ तो सुबह सुबह जल्दी ही नहा लेती और फिर दिन भर कमरे में ही बैठी रहती। एक दिन वो दोनों लड़कियाँ तो नहा ली थी और वहीं चारपाई पर धूप में बैठी अपने बाल वगैरह सूखा रही थी। मैं नहाने की तैयारी कर रही थी तो मैंने बाहर ही उन दोनों के सामने ही अपने कपड़े खोल दिये और अपने शरीर पर एक तौलिया लपेट लिया था और मैं ऐसे ही घूम रही थी। फिर इतने में नौकर वहाँ आ गया और वो किसी चीज के बारे में पूछने लगा। तो मैं बोली के चलो मैं चलकर देखती हूँ। फिर मैं उसके साथ पीछे पशुओ की तरफ जाने लगी ऐसे ही तौलिए में ही। फिर हम वहाँ से थोड़ी दूर आ गए तो नौकर मेरी बॉडी से खेलने लगा और फिर मैंने भी मेरा तौलिया उतार दिया और नंगी होकर चलने लगी। फिर मैंने तौलिया भी वहीं एक खूंटे पर टांग दिया और नौकर के साथ घर के पीछे चली गई। वहाँ जाते ही नौकर भी नंगा हो गया और फिर मुझे वहीं घोड़ी बनाकर करने लगा। फिर वो झड़ गया तो फिर उसने तो कपड़े वापिस पहन लिए और फिर हम पशुओं के लिए चारा लाने लगे।

मैं चारा डालकर नौकर के सिर पर रखवा देती और वो चारा लाकर अंदर डाल देता। इस सब में मुझे काफी देर लग गई तो उनमें से एक लड़की हम काम कर रहे थे वहाँ आ गई। मुझे पता नहीं चला के वो कब आ गई। मैं और नौकर तो अपने काम में मगन थे। फिर मेरा उसकी तरफ ध्यान गया तो मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और उसे बोला के मैं आती हूँ अभी तुम चलो। मैंने नौकर से पहले कर लिया था तो हम दोनों शांत होकर काम कर रहे थे। फिर वो चली गई। फिर मैंने कुछ देर और काम करवाया और फिर मैं नौकर के साथ नंगी ही अंदर आने लगी। फिर मैं अपना तौलिया लेकर उसे बिना लपेटे ही नहाने चली गई। वहाँ वो दोनों लड़कियाँ बैठी थी। फिर वो कुछ नहीं बोल रही थी तो फिर मैंने कहा के वो मुझे अपनी   बेटी की तरह मानता हैं और कमर दबवाते टाइम भी मुझे नंगी होना पड़ता हैं और कुछ मुझे वो बीमारी भी हैं तो मैं अब उसके सामने नंगी ही रहती हूँ। फिर वो बोली के आपको शर्म नहीं आती। फिर मैंने हंसकर बोला के अब तो नहीं आती। तब धूप ज्यादा थी तो मैं बाहर ही बैठकर नहाने लगी। नहाने के बाद भी नंगी ही कमरे में चली  गई और जाकर कपड़े पहने। अब तो मैं पूरी उनके सामने खुल चुकी थी और उन दोनों ने मुझ पर विस्वास भी कर लिया था।

अब मैं रात को भी सोती तो नंगी होकर ही सोती। कई बार सास भी आ जाती तब भी मैं ऐसे ही नंगी ही काम करती रहती। पति और राज आते तब भी मैं उनके सामने ऐसे ही नंगी फिरती रहती। मैंने उन दोनों लड़कियों को बता दिया था के जेठ जी की शादी नहीं हो रही थी तो सास ने मेरी शादी जेठ जी से करवा दी। अब मैं उन दोनों की बीवी हूँ। अब मेरा तो रास्ता साफ था सबके सामने नंगी रहने का। मेरा मन करता तब मैं पति और राज के पास चली जाती या नौकर के पास। मुझे काफी मजा आ रहा था ऐसे सबके सामने नंगी होकर घूमने में।

अगले भाग में बताऊंगी के पति की भुआ और घर के सब जनों को मैंने नंगा कैसे किया.....


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