पति को मैंने ऐहसास दिलाया के उनके बिना कैसे मैं तड़प तड़प कर जीती हूँ। फिर पति थोड़े दिन सोचते रहे के ऐसा क्या किया जाए के मेरी तड़प मिट जाए। फिर एक दिन मैं कुछ काम से घर के पीछे की तरफ गई तो मैंने देखा के जेठ जी नहा रहे थे। वो बाहर खुले में ही नहा रहे थे। तब दोपहर का टाइम था। फिर मैंने देखा के जेठ जी ने अपना अंडरवियर खोल दिया और नंगे होकर अपने ऊपर पानी डालने लगे। उनका शरीर खेत में काम करने की वजह से काफी अच्छा था। फिर वो अपना लंड सहलाने लगे तो उनका लंड खड़ा हो गया। उनका लंड तो मैं देखती ही रह गई। ये सब मैं छिपकर देख रही थी। फिर वापिस मैं अपने कमरे में पति के पास आ गई और थोड़ी थोड़ी मुस्कुरा रही थी। तो पति ने पूछा के क्या बात हैं। तो मैंने जो देखा वो सब बता दिया। फिर पति बोले के बेचारा वो भी तड़प रहा हैं। फिर कुछ दिन तक तो कुछ खास नहीं हुआ।
फिर एक दिन पति मेरे पास न्यूज़पेपर पढ़ते पढ़ते आये और मुझे न्यूज़ दिखाने लगे। वो न्यूज़ इस प्रकार थी कि एक लड़का फ़ौज में था। वो शहीद हो गया तो उसका बीवी की शादी उनके परिवार में ही किसी लड़के से कर दी। मैंने न्यूज़ पढ़कर पति से पूछा इसमें क्या खास हैं। फिर पति ने मुझसे सीधे ही पूछ लिया के क्या तुम भाई से शादी करोगी। तो मैं बोली के ये आप क्या बोल रहे हो। मैं आपसे प्यार करती हूँ तो किसी और से शादी क्यों करूँगी। फिर पति मुझे समझने लगे के मै भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं तुम्हे तड़पते हुए नहीं देख सकता। फिर पति बोले के तुम्हारी और भाई की शादी के बारे में हम बाहर किसी को नहीं बताएंगे। ये शादी वैसे नहीं होगी बस तुम भाई के साथ उसकी पत्नी की तरह रहने लग जाओ। फिर मैं बोली के घरवालों से क्या कहोगे आप। तो फिर पति बोले के उन सब को मैं सम्भाल लूँगा। फिर मैं बोली के ठीक है।
फिर पति ने सबसे पहले सास से बात की। पति बोले के मैं फ़ौज में हूँ। पता नहीं कब क्या हो जाये और छुट्टियाँ भी इतनी नहीं मिलती हैं। अगर मुझे कुछ हो जाता हैं तो फिर नीरू को किसी और से शादी तो करनी ही पड़ेगी। सारी जिंदगी मेरी विधवा बनकर तो नहीं जी सकती हैं। इससे अच्छा हैं के ये अभी भाई से शादी कर ले। फिर सास बोली के ये तू क्या कह रहा हैं। तेरे जीते जी ये शादी नहीं करवा सकते। फिर पति बोले के इस शादी का पता सिर्फ हमें ही होगा बाहर किसी को कुछ पता नहीं लगेगा। नीरू के माता पिता से भी पूछ लेंगे वो राजी होगए तो फिर कर देंगे शादी। दोनों बेचारे तन्हाई में तड़प तड़प कर जिंदगी बिता रहे हैं। फिर सास बोली के तुम दोनों राजी हो तो मैं भी राजी हूँ। फिर पति ने कहा के नीरू के पापा को बुला लेते हैं और उनके सामने ये बात रखते हैं। फिर मम्मी बोली के ठीक है।
फिर पापा को बुलाया और उन्हें सब बातें बताई तो वो बोले के अगर नीरू को कोई एतराज़ ना हो तो मुझे भी कोई एतराज नहीं हैं। फिर पापा बोले के मैं नीरू से अकेले मैं बात कर लेता हूँ। फिर पति बोले के मैं भाई से बात कर लेता हूँ। मैं वहीं खड़ी थी कमरे के बाहर तो पापा मुझे लेकर कमरे में आ गए और आगे से कमरा बंद कर लिया। फिर पापा ने मुझसे पूछा के तुम्हे कोई एतराज़ तो नहीं हैं ना। तो मैं हंसकर बोली के चुदाई में किसी को क्या एतराज हो सकता हैं। तो पापा भी फिर हँसने लगे। पापा बोले के अब तो जी भरकर चुद लेना उससे। मैं बोली के उससे पहले आप चोद लो। फिर मैं पापा से लिपट गई और और भी अपने हाथ पीछे ले जाकर मेरी गाँड दबाने लगे। फिर मैंने अपने सारे कपड़े खोल दिए। फिर पापा ने भी अपने कपड़े खोल दिये और मुझे बेड पर लेटाकर मेरे ऊपर आ गए। फिर वो मेरे बूब चूसने लगे और फिर लंड डालकर करने लगे। फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और करने लगे। बंद कमरा था और फिर लाइट भी चली गई थी तो मैं और पापा पसीने से भीग गए थे। फिर पापा मेरी गाँड में झड़ गए और बेड पर लेट गए। फिर मैंने पापा का लंड चुसकर साफ किया और फिर एक कपड़े से पसीना पोंछकर कपड़े पहनने लगी। फिर मैंने पापा का भी पसीना पोंछा और फिर उन्होंने भी कपड़े पहन लिए। हम कमरे में एक घण्टे के लगभग रहे और फिर पापा बाहर चले गए।
पापा सास के पास चले गए और मैं चाय बनाने चली गई। फिर मैं चाय बनाकर उन्हें देने गई तो सास बोल रही थी के इसी बहाने मेरे बेटे की भी शादी हो जाएगी। वैसे तो अच्छा है के मेरी यही बहु फिर से बहु बनेगी। अगर कोई और आती तो पता नहीं वो कैसी होती। ये तो मेरी बेटी जैसी हैं। पति अगले दिन जाने वाले थे तो पति बोले के कल इनकी शादी करवा देना। फिर सास बोली के हाँ कल इन्हें घर के मंदिर में बैठकर पूजा वगैरह करवाकर बेटा इसे मंगलसूत्र पहना देगा। मेरे जेठ का नाम राजेश हैं और उन्हें वैसे राजू कहकर बुलाते हैं। सास ने पापा को भी यहीं रोक लिया और कल जाने को कहा। फिर रात को पति ने मुझे जाते ही नंगी कर लिया और मेरी बॉडी से खेलने लगे। फिर बोले के तुम्हे एक बात बताऊँ। मैं बोली के हाँ बताइए। फिर वो बोले के मैं भी पहले सेक्स करने के लिए काफी तड़पता था। फिर एक अफसर की विधवा बेटी से जान पहचान हुई और फिर उससे करने लगा। पर मैं प्यार तुमसे करता हूँ वो तो बस तन की प्यास बुझाने के लिए हैं। फिर मैं ये सब सुनकर खुश हो गई और बोली के कम से कम आप तो नहीं तड़पते हो यही मेरे लिए बहोत हैं। फिर पति बोले के अबसे तुम भी नहीं तड़पोगी। खूब मजे करना कल से। फिर वो मुझे चोदने लगे। फिर हम पता नहीं कब सो गए।
सुबह पति को जल्दी जाना था तो वो उठे और तैयार होने लगे। मैने उनका समान पैक कर दिया और फिर वो चले गए। फिर सास मुझसे बोली के तुम नहाकर तैयार हो जाओ और आज मांग मत भरना और ना ही मंगलसूत्र पहनना। तो मैं जल्दी से तैयार हो गई। मेरे पास एक सूट था उसकी फिटिंग टाइट थी और गला थोड़ा बड़ा था तो मैंने वो पहन लिया। उसमें मेरे बूब भी काफी दिख रहे थे। फिर मैं घूँघट निकालकर बाहर आ गई। फिर मम्मी हमें पूजा घर में ले गई। पूजा घर एक कमरे में बनाया हुआ था। वहाँ ससुर और पापा तो थोड़े दूर बैठे थे और सास और जेठ जी मूर्ति वगैरह रखी थी वहाँ पास में बैठे थे। फिर मैं भी वहाँ जाकर बैठ गई। फिर सास ने मुझे घूँघट हटाकर सिर पर चुन्नी करने को कहा तो मैंने वैसे ही कर लिया। फिर पापा कहने लगे अब ये नौकरी लग गई अब आप इससे घूँघट ना निकलवाया करो। बाहर सब के सामने ये बिना घूँघट के रहती हैं तो घर मे क्या दिक्कत है। फिर सास बोली के अब से नहीं निकलवाएंगे।
फिर सास ने ज्योत वगेरह जलाई और हम दोनों की आरती उतारी। फिर सास ने जेठ जी से कहा के वो मेरी मांग भरे और मंगलसूत्र पहनाए। फिर उन्होंने ऐसा ही किया। फिर सास ने हमें बड़ो के पैर छूने को कहा तो हम खड़े हुए और पहले ससुर के पैर छुए फिर पापा के और फिर सास के। खाना पहले ही तैयार कर लिया था तो फिर पहले ससुर और पापा को खाना परोसा और फिर मैंने सास और जेठ जी यानी अबसे मेरे पति को खाना खिलाया। फिर मैंने खुद खाया। फिर पापा तो वापिस चले गए और सास ससुर के पास चली गई। फिर मैं बर्तन वगेरह साफ करके कमरे में गई तो राजू/राज बेड पर लेटे थे। मैं अंदर आई तो वो उठ गए तो मैंने उन्हें लेटे रहने के लिए कहा। फिर मैं भी जाकर उनके पास लेट गई दूसरी तरफ मुँह करके। फिर राज बोले के तुम मुझे पसंद करती हो क्या। मैंने कहा के हाँ तभी तो आप से शादी कर ली। फिर मैं उनकी तरफ मुँह करके सो गई। वो सीधे सोये थे। फिर वो बोले के तुम बहुत अच्छी हो जो मुझ जैसे से शादी की। फिर मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा और बोली के आप भी काफी अच्छे हो। फिर उन्होंने मेरे हाथ अपने दूसरे हाथ से पकड़ लिया और मेरी तरफ करवट लेकर सो गए। फिर वो मुझे कुछ देर देखते रहे और फिर मेरी कमर पर हाथ रख लिया। मैं आँख बंद करके सोई थी। फिर वो अपना हाथ धीरे धीरे मेरी बॉडी पर ऊपर की ओर ले जाने लगे।
अगले भाग में बताती हूँ के आगे क्या क्या हुआ....
फिर एक दिन पति मेरे पास न्यूज़पेपर पढ़ते पढ़ते आये और मुझे न्यूज़ दिखाने लगे। वो न्यूज़ इस प्रकार थी कि एक लड़का फ़ौज में था। वो शहीद हो गया तो उसका बीवी की शादी उनके परिवार में ही किसी लड़के से कर दी। मैंने न्यूज़ पढ़कर पति से पूछा इसमें क्या खास हैं। फिर पति ने मुझसे सीधे ही पूछ लिया के क्या तुम भाई से शादी करोगी। तो मैं बोली के ये आप क्या बोल रहे हो। मैं आपसे प्यार करती हूँ तो किसी और से शादी क्यों करूँगी। फिर पति मुझे समझने लगे के मै भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं तुम्हे तड़पते हुए नहीं देख सकता। फिर पति बोले के तुम्हारी और भाई की शादी के बारे में हम बाहर किसी को नहीं बताएंगे। ये शादी वैसे नहीं होगी बस तुम भाई के साथ उसकी पत्नी की तरह रहने लग जाओ। फिर मैं बोली के घरवालों से क्या कहोगे आप। तो फिर पति बोले के उन सब को मैं सम्भाल लूँगा। फिर मैं बोली के ठीक है।
फिर पति ने सबसे पहले सास से बात की। पति बोले के मैं फ़ौज में हूँ। पता नहीं कब क्या हो जाये और छुट्टियाँ भी इतनी नहीं मिलती हैं। अगर मुझे कुछ हो जाता हैं तो फिर नीरू को किसी और से शादी तो करनी ही पड़ेगी। सारी जिंदगी मेरी विधवा बनकर तो नहीं जी सकती हैं। इससे अच्छा हैं के ये अभी भाई से शादी कर ले। फिर सास बोली के ये तू क्या कह रहा हैं। तेरे जीते जी ये शादी नहीं करवा सकते। फिर पति बोले के इस शादी का पता सिर्फ हमें ही होगा बाहर किसी को कुछ पता नहीं लगेगा। नीरू के माता पिता से भी पूछ लेंगे वो राजी होगए तो फिर कर देंगे शादी। दोनों बेचारे तन्हाई में तड़प तड़प कर जिंदगी बिता रहे हैं। फिर सास बोली के तुम दोनों राजी हो तो मैं भी राजी हूँ। फिर पति ने कहा के नीरू के पापा को बुला लेते हैं और उनके सामने ये बात रखते हैं। फिर मम्मी बोली के ठीक है।
फिर पापा को बुलाया और उन्हें सब बातें बताई तो वो बोले के अगर नीरू को कोई एतराज़ ना हो तो मुझे भी कोई एतराज नहीं हैं। फिर पापा बोले के मैं नीरू से अकेले मैं बात कर लेता हूँ। फिर पति बोले के मैं भाई से बात कर लेता हूँ। मैं वहीं खड़ी थी कमरे के बाहर तो पापा मुझे लेकर कमरे में आ गए और आगे से कमरा बंद कर लिया। फिर पापा ने मुझसे पूछा के तुम्हे कोई एतराज़ तो नहीं हैं ना। तो मैं हंसकर बोली के चुदाई में किसी को क्या एतराज हो सकता हैं। तो पापा भी फिर हँसने लगे। पापा बोले के अब तो जी भरकर चुद लेना उससे। मैं बोली के उससे पहले आप चोद लो। फिर मैं पापा से लिपट गई और और भी अपने हाथ पीछे ले जाकर मेरी गाँड दबाने लगे। फिर मैंने अपने सारे कपड़े खोल दिए। फिर पापा ने भी अपने कपड़े खोल दिये और मुझे बेड पर लेटाकर मेरे ऊपर आ गए। फिर वो मेरे बूब चूसने लगे और फिर लंड डालकर करने लगे। फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और करने लगे। बंद कमरा था और फिर लाइट भी चली गई थी तो मैं और पापा पसीने से भीग गए थे। फिर पापा मेरी गाँड में झड़ गए और बेड पर लेट गए। फिर मैंने पापा का लंड चुसकर साफ किया और फिर एक कपड़े से पसीना पोंछकर कपड़े पहनने लगी। फिर मैंने पापा का भी पसीना पोंछा और फिर उन्होंने भी कपड़े पहन लिए। हम कमरे में एक घण्टे के लगभग रहे और फिर पापा बाहर चले गए।
पापा सास के पास चले गए और मैं चाय बनाने चली गई। फिर मैं चाय बनाकर उन्हें देने गई तो सास बोल रही थी के इसी बहाने मेरे बेटे की भी शादी हो जाएगी। वैसे तो अच्छा है के मेरी यही बहु फिर से बहु बनेगी। अगर कोई और आती तो पता नहीं वो कैसी होती। ये तो मेरी बेटी जैसी हैं। पति अगले दिन जाने वाले थे तो पति बोले के कल इनकी शादी करवा देना। फिर सास बोली के हाँ कल इन्हें घर के मंदिर में बैठकर पूजा वगैरह करवाकर बेटा इसे मंगलसूत्र पहना देगा। मेरे जेठ का नाम राजेश हैं और उन्हें वैसे राजू कहकर बुलाते हैं। सास ने पापा को भी यहीं रोक लिया और कल जाने को कहा। फिर रात को पति ने मुझे जाते ही नंगी कर लिया और मेरी बॉडी से खेलने लगे। फिर बोले के तुम्हे एक बात बताऊँ। मैं बोली के हाँ बताइए। फिर वो बोले के मैं भी पहले सेक्स करने के लिए काफी तड़पता था। फिर एक अफसर की विधवा बेटी से जान पहचान हुई और फिर उससे करने लगा। पर मैं प्यार तुमसे करता हूँ वो तो बस तन की प्यास बुझाने के लिए हैं। फिर मैं ये सब सुनकर खुश हो गई और बोली के कम से कम आप तो नहीं तड़पते हो यही मेरे लिए बहोत हैं। फिर पति बोले के अबसे तुम भी नहीं तड़पोगी। खूब मजे करना कल से। फिर वो मुझे चोदने लगे। फिर हम पता नहीं कब सो गए।
सुबह पति को जल्दी जाना था तो वो उठे और तैयार होने लगे। मैने उनका समान पैक कर दिया और फिर वो चले गए। फिर सास मुझसे बोली के तुम नहाकर तैयार हो जाओ और आज मांग मत भरना और ना ही मंगलसूत्र पहनना। तो मैं जल्दी से तैयार हो गई। मेरे पास एक सूट था उसकी फिटिंग टाइट थी और गला थोड़ा बड़ा था तो मैंने वो पहन लिया। उसमें मेरे बूब भी काफी दिख रहे थे। फिर मैं घूँघट निकालकर बाहर आ गई। फिर मम्मी हमें पूजा घर में ले गई। पूजा घर एक कमरे में बनाया हुआ था। वहाँ ससुर और पापा तो थोड़े दूर बैठे थे और सास और जेठ जी मूर्ति वगैरह रखी थी वहाँ पास में बैठे थे। फिर मैं भी वहाँ जाकर बैठ गई। फिर सास ने मुझे घूँघट हटाकर सिर पर चुन्नी करने को कहा तो मैंने वैसे ही कर लिया। फिर पापा कहने लगे अब ये नौकरी लग गई अब आप इससे घूँघट ना निकलवाया करो। बाहर सब के सामने ये बिना घूँघट के रहती हैं तो घर मे क्या दिक्कत है। फिर सास बोली के अब से नहीं निकलवाएंगे।
फिर सास ने ज्योत वगेरह जलाई और हम दोनों की आरती उतारी। फिर सास ने जेठ जी से कहा के वो मेरी मांग भरे और मंगलसूत्र पहनाए। फिर उन्होंने ऐसा ही किया। फिर सास ने हमें बड़ो के पैर छूने को कहा तो हम खड़े हुए और पहले ससुर के पैर छुए फिर पापा के और फिर सास के। खाना पहले ही तैयार कर लिया था तो फिर पहले ससुर और पापा को खाना परोसा और फिर मैंने सास और जेठ जी यानी अबसे मेरे पति को खाना खिलाया। फिर मैंने खुद खाया। फिर पापा तो वापिस चले गए और सास ससुर के पास चली गई। फिर मैं बर्तन वगेरह साफ करके कमरे में गई तो राजू/राज बेड पर लेटे थे। मैं अंदर आई तो वो उठ गए तो मैंने उन्हें लेटे रहने के लिए कहा। फिर मैं भी जाकर उनके पास लेट गई दूसरी तरफ मुँह करके। फिर राज बोले के तुम मुझे पसंद करती हो क्या। मैंने कहा के हाँ तभी तो आप से शादी कर ली। फिर मैं उनकी तरफ मुँह करके सो गई। वो सीधे सोये थे। फिर वो बोले के तुम बहुत अच्छी हो जो मुझ जैसे से शादी की। फिर मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा और बोली के आप भी काफी अच्छे हो। फिर उन्होंने मेरे हाथ अपने दूसरे हाथ से पकड़ लिया और मेरी तरफ करवट लेकर सो गए। फिर वो मुझे कुछ देर देखते रहे और फिर मेरी कमर पर हाथ रख लिया। मैं आँख बंद करके सोई थी। फिर वो अपना हाथ धीरे धीरे मेरी बॉडी पर ऊपर की ओर ले जाने लगे।
अगले भाग में बताती हूँ के आगे क्या क्या हुआ....
मस्त कहानी है
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
DeleteHi payal
DeleteHi payal tmko aisi gandi tatti peshab wali family chudia pasdn ho to sanatgautam@gmail.com pr mail kro.
ReplyDeletePost a Comment