पापा को काम से इधर उधर जाना पड़ता था। पापा कभी कभी सुबह जाते और फिर शाम को ही घर आते थे। कई बार वो किसी दूसरे गाँव चले जाते तो 2-3 दिन बाद ही आते थे। पापा दिन में गए होते तो हम तीनों और रामू एक कमरे में ही सोते। मम्मी और दाई रामू के साथ बेड पर सोती और मैं चारपाई पर। फिर मैं भी अपने बच्चे को दूध वगैरह पिलाकर और सुलाकर उनके पास बेड पर चली जाती। फिर रामू मम्मी से करता तो मैं उसका लंड पकड़कर मम्मी की चूत में डाल देती। फिर मैंने रामू का लंड चूसा तो वो मेरे मुँह में ही झड़ गया और मैं उसका सारा पानी पी गई। मम्मी रामू से करती तो मुझसे भी नहीं रहा जाता तो मैं घोड़ी बन जाती और रामू से गाँड में करवा लेती। फिर मैं और मम्मी तो रामू के साथ काफी मजे करती। मैं और मम्मी कभी झुकी कर खड़ी होती तो रामू पीछे से आकर करने लग जाता। मम्मी तो जानबूझकर रामू को अपनी गाँड हिलाकर दिखाती तो रामू भागा चला आता।

पापा के सामने भी मैं रामू से गाँड मरवा लेती थी। एक दिन पापा और रामू शाम के टाइम बाहर चौकी पर बैठे थे। मैं नहाकर आई थी और आकर रामू के पास बैठ गई। पापा हार्दिक के साथ खेल रहे थे। फिर मैं रामू के साथ चिपक कर उसकी कमर में हाथ डालकर बैठ गई। फिर रामू ने भी मेरी कमर में हाथ डाल लिया। फिर मैंने रामू का लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर मैंने रामु को लेटा लिया और मैं उसके ऊपर आ गई और उसकी बॉडी चूमने लगी। फिर मैं उसके साथ उसकी तरफ पीठ करके सो गई अपने हाथ से अपनी गाँड सहलाने लगी। फिर रामू का ध्यान मेरी गाँड पर गया तो वो मेरी तरफ करवट लेकर सोया और अपना लंड मेरी गाँड में डाल दिया और करने लगा। फिर उसने मुझे घोड़ी बना लिया और करने लगा। पापा के सामने उसका लंड मेरी गाँड से अंदर बाहर हो रहा था। फिर रामू झड़ गया तो उसने अपना पानी मेरी गाँड में डाल दिया और फिर बैठ गया। फिर मैं भी हाँफती हुई उसके पास ही बैठ गई। मैं पसीने से भीग गई थी तो मैं वापिस नहाने जाने लगी। वापस जा रही थी तो उसका पानी मेरी गाँड से निकलकर पैर के सहारे नीचे तक बह रहा था। जिससे मुझे काफी अच्छा लग रहा था। सुबह पापा और रामू खेत में जाते तो उनके साथ मैं भी चली जाती। फिर खेत में मैं दोनों से कर लेती। 

एक बार पापा कहीं बाहर गए थे कुछ दिन के लिए। तब दोपहर को मैं और मम्मी रामू से करके सोई थी। मम्मी मेरे पीछे की साइड सोई थी और रामु मेरे आगे और फिर दाई सोई थी। रामू ने हमसे किया था तो उसका लंड अभी बैठा ही था। फिर दाई अपने बेटे का लंड हिलाने लगी। हम साथ में बातें भी कर रहे थे। फिर मैंने और मम्मी ने दाई को रामू का लंड चूसने के लिए राजी किया। हमने दाई से कहा के हम दोनों भी मजे करती हैं तो तू भी कर लिया कर। यहाँ कोई बाहर वाले को नहीं बताएगा। कई और बातें भी बोली तो दाई राजी हो गई। फिर दाई खड़ी हुई और अपने बेटे के पैरों के बीच में आकर उसका लंड मुँह में ले लिया और फिर चूसने लगी। माँ को बेटे का लंड मुँह में लेता देखकर मैं और मम्मी तो अपनी  चूत सहलाने लगी थी। फिर दाई कुछ देर चूसती रही तो दाई भी फुल गर्म हो गई थी। फिर मम्मी खड़ी हुई और दाई को बेड पर लेटाया और उसकी चूत सहलाने लगी। फिर मम्मी ने रामू को दाई से करने का इशारा किया तो रामू उठकर दाई के ऊपर आ गया। फिर दाई का एक पैर मैंने पकड़ लिया और दूसरा मम्मी ने। रामू ने अपना लंड दाई की चूत पर लगाया और फिर धक्का मारकर आधे से ज्यादा लंड दाई की चूत में डाल दिया। तो दाई थोड़ी चीखने चिल्लाने लगी। फिर रामू से मम्मी ने धक्के लगाने के लिए कहा तो रामू धक्के लगाने लगा। फिर दाई को मजा आने लगा तो वो भी मजे से चुदने लगी। मैं और मम्मी उन्हें देखने लगी। रामू ने धक्के तेज कर दिए तो दाई हिलने लगी और बेड भी हिलने लगा था। फिर रामू झड़ा तो उसने अपना सारा माल अपनी माँ के अंदर ही डाल दिया और ऊपर ही सो गया। ऐसी चुदाई के बाद दाई भी काफी शांत दिख रही थी। फिर दोपहर का टाइम था तो हम सब सो गए। शाम को उठे तो दाई की चूत थोड़ी सूजी हुई थी। दाई थोड़ी शर्मा भी रही थी करके। फिर मम्मी बोली के शर्मा मत और जितना मन करे उतना कर अपने बेटे से। फिर हम हँसने लगी। फिर रात को हम खाना खाकर बाहर चौकी पर आ गए। फिर दाई ने रामू से अपनी गाँड भी मरवाई। फिर मैं और मम्मी ने रामू से करना कम कर दिया और उन दोनों माँ बेटे को आपस में ज्यादा से ज्यादा करवाने लगी। फिर पापा आए तो मैंने और मम्मी ने पापा को ये बताया तो पापा बोले के चलो कर लिया तो बढ़िया हुआ। फिर पापा के सामने दाई को अपने बेटे से करने में शर्म आ रही थी। लेकिन फिर करने लगी तो सब शर्म दूर हो गई और फिर खुलकर करने लगी। 

फिर हम सब ऐसे ही करते रहे और मजे लेते रहे। टाइम का पता ही नहीं चला कब निकल गया और मेरे ससुराल जाने का समय आ गया। फिर मैंने अपने लिए कई सूट सिलवाए। मम्मी पहले से पतली हो गई थी और मैं मोटी तो हम दोनों को एक दूसरे के सूट आने लगे थे। फिर पति छूट्टी पर आए तो वो मुझे आके ले गए। मैं जा रही थी तब हमने जो जो किया वो सब याद आ रहा था। मुझे पति के साथ जाने की खुशी भी थी और मम्मी पापा से बिछड़ने का दुःख भी। पर जाना तो था ही तो मैं ससुराल आ गई। 

आगे बताऊंगी के ससुराल में क्या क्या हुआ और मेरी मेरे जेठ से शादी कैसे हुई.....


                         ससुराल में पापा के साथ किया

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