मुझे 8 वां महीना लग चुका था तो मम्मी ने मुझे ज्यादा घूमने फिरने के लिए नहीं बोला। फिर मैं सारा दिन बेड पर ही पड़ी रहती। पर मैं पड़ी पड़ी काफी बोर हो जाती थी। फिर पापा मेरे साथ सोते तो वो कभी मेरे बूब दबाते कभी मेरे किस करते अपने हाथों से मेरे शरीर पर गुदगुदी करते रहते। वो पास होते तो तब तो टाइम अच्छा कट जाता था। पापा के साथ मैं सुबह और शाम घर के लॉन वगैरह में और कभी कभी खेत में भी घूम आती थी। पापा अब मुझसे करते तो नहीं थे पर अब वो मुझे अपना लंड चुसवाते थे और मैं भी काफी मजे लेकर उनका लंड चुस्ती थी। मैं बेड पर सहारा लेकर बैठ जाती थी और वो घुटनों के बल होकर मेरे पास आकर खड़े हो जाते थे। फिर वो मेरे मुँह में डालकर आगे पीछे होते रहते जैसे वो मुझे चोद रहे हो। उनका पानी कई बार मेरे मुँह में निकल जाता और कई बार वो मेरे बूब पर झड़ जाते तो मैं उनके पानी को अपने बूब पर मसलती रहती। काफी मजा आता था ऐसे।
लेकिन फिर जब डिलीवरी में कुछ दिन रह गए तो मम्मी ने गांव की दाई को बुला लिया। वो हमारे घर ही रहने लगी थी। फिर उसके सामने एक दो दिन तो मैंने नाइटी पहनी पर नाइटी में मुझे काफी दिक्कत होती थी तो मम्मी ने मुझसे नहीं पहनने को बोला तो फिर वो दाई भी बोली के हाँ मत पहनो यहाँ हम ही तो हैं। फिर मैं सारा दिन बेड पर सोई रहती और वो मम्मी और दाई बातें करती रहती। पापा तो बाहर के रूम में ही रहते थे ज्यादातर। फिर मम्मी भी अपनी कमर दर्द का बहाना बनाकर ऊपर से नंगी हो जाती और दाई से मालिश करवा लेती और फिर ऐसे ही रहती। फिर धीरे धीरे दाई के सामने मम्मी पूरी नंगी रहने लगी। दाई मम्मी की ही उम्र की थी तो हम उससे इतने नहीं शर्माते।
रात को हम तीनों आँगन में ही सोते थे पर मम्मी कभी कभी पापा के पास सो जाती थी। रात को भी मैं और मम्मी नंगी ही सोती। मम्मी तो फिर नंगी ही पापा के पास चली जाती और सुबह आती तो मैं और दाई जागे हुए होते तब मम्मी नंगी ही आती और घर के कामों में लग जाती। फिर एक दिन मम्मी ने दाई को भी उनकी कमर की मालिश करवाने के लिए कहा पर दाई नहीं मान रही थी तो मम्मी ने जिद करके उनको भी ऊपर से नंगी कर लिया और फिर नीचे से भी। फिर मम्मी तो दाई की फुल बॉडी मसाज कर देती और दाई को भी अच्छा लगता तो वो भी मसाज करवाने के लिए पहले ही नंगी हो जाती थी। फिर मम्मी और दाई पहले एक दूसरे की मालिश करती और फिर दोनों मेरी करती। मैं कई बार मम्मी को बूब देने के लिए कहती तो मम्मी और दाई हँसने लगती और मैं मम्मी का बूब लेती। फिर मैंने एक दिन दाई को भी बूब देने के लिए बोली और उनका बूब मुँह में लेके चूसने लगी। फिर वो बोली के अब तो कोई तेरे बूब लेने वाला आने वाला हैं और फिर हँसने लगी। हम तीनों एक दूसरे से काफी घुल मिल गई थी।
फिर एक दिन में हम सब ऑइल मसाज में लगे थे तब पापा ने मम्मी को आवाज लगाई तो मम्मी वैसे ही नंगी बाहर चली गई। फिर मैं और दाई एक दूसरे को देखकर हँसने लगी। फिर मुझे भी टॉयलेट जाना था तो मैंने दाई से कहा। दाई तब नंगी ही बैठी थी वो बोली के मै करवा लाती हूँ फिर मैं बोली के पापा चले गए होंगे तो मुझे मम्मी करवा लाएगी। फिर दाई बोली के ठीक है आराम से जाना। मैं बोली के हाँ। फिर मैं नंगी ही उठकर चलने लगी और कमरे से बाहर आई तो देखा के सामने की और दूसरे कमरे के आगे पापा ने मम्मी को चारपाई पर घोड़ी बना रखा हैं और खुद भी पूरे नंगे होकर कर रहे हैं। ये देखकर मैने जल्दी से कमरे के गेट बंद किए और फिर उनके पास जाकर उन्हें देखने लगी। फिर पापा ने मम्मी को सीधा सुलाया और उनकी चूत में डालकर करने लगे और झड़ गए। फिर पापा उठे तो मैंने पास जाकर उनका लंड पकड़ लिया। फिर मैं चारपाई पर बैठ गई और पापा का लंड मुँह में लेकर चूसने लगी और चूसकर साफ कर दिया। फिर पापा तो बाहर चले गए और मम्मी वैसे ही पैर फैलाये सोई थी। फिर मैं मम्मी की चूत में हाथ डालने लगी तो मम्मी सिसकारी लेने लगी। फिर मैं मम्मी से बोली के बहुत मजे ले लिए अब खड़ी हो जाओ वरना दाई माँ बाहर आ जायेगी। तो मेरी तरफ मुस्कुराते हुए खड़ी हो गई। फिर मैंने मम्मी को वाशरूम जाने के लिए कहा तो वो मुझे ले गई और फिर हम वापिस कमरे में आ गई। फिर हम तीनों बैठ गई तो मम्मी पैर फैलाकर बैठी थी तो पापा के लंड का पानी अभी मम्मी के चूत में था और धीरे धीरे बाहर आ रहा था। फिर मम्मी ने अपनी चूत फैलाकर उसके बारे में दाई से पूछा। मैं और मम्मी एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थी।
फिर दाई मम्मी की चूत देखने लगी और बोली के अंदर कोई घाव हो गया होगा। फिर मम्मी ने अपनी उंगली अंदर डाल ली और देखने लगी। फिर मम्मी बोली के दर्द तो नहीं हो रहा उंगली डालने पर। फिर मम्मी बेड पर सो गई और अपनी चूत में हमारे सामने ही उंगली डालकर धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगी। फिर दाई भी अपनी चूत सहलाने लगी। उनकी चूत पर बाल थे और मेरी और मम्मी की बिल्कुल साफ थी। तो मम्मी बोली के इन बालों को काट लिया करो नहीं तो खुजली हो जाएगी। तो दाई बोली के हाँ काफी दिक्कत होती हैं। फिर मम्मी बोली के काट लिया करो तो। फिर दाई बोली के अब क्या काटूँ। सारी जिंदगी तो निकल गई। फिर मम्मी बोली के तो क्या हुआ अब काट लिया करो। फिर मम्मी बोली के लाओ एक बार मे काट देती हूँ फिर अपने आप काट लेना। फिर दाई इंकार करने लगी। फिर मम्मी बोली के चलो बाहर चलते हैं फिर मम्मी ने पापा के लिए कहा के अभी वो भी बाहर गए हैं। फिर हम सब कमरे से बाहर निकलकर घर के साइड में एक पेड़ लगा है उसके नीचे जाकर बैठ गए। मैं तो सो गई थी और मम्मी जाकर पापा का शेविंग का सामान ले आई थी। फिर मम्मी ने दाई को पैर फैलाकर सोने को बोला तो दाई थोड़ी शर्माती हुई सो गई। फिर मम्मी लगी शेव करने और कुछ देर में ही उनके पूरे बाल हटा दिए तो दाई तो हाथ फेर फेरकर अपनी चूत देखने लगी।
फिर मैंने भी दाई की चूत पर हाथ फेरकर देखा। फिर मम्मी बोली के लग रही हैं ना अब बिल्कुल जवान चूत। तो वो बोली के हाँ लग तो रही हैं और फिर हँसने लगी। फिर वो दाई और मम्मी गाँव की सेक्सी सेक्सी बातें करने लगी। दाई बताने लगी के उनके सामने के घर मे एक औरत रहती हैं जिसका पति तो बाहर काम करता हैं और वो यहाँ पूरे गाँव से चुद रही हैं। मम्मी बोली के बेचारी खुद को रोक नहीं पाती होगी और फिर हम सब हँसने लगे। फिर दाई मम्मी से बोली के तेरा पति तो तुझे खूब खुश रखता होगा तो मम्मी बोली के हाँ उनका वश चले तो वो सारा दिन मुझसे करते ही रहे। फिर दाई मम्मी से बोली के तुम तो अभी भी पहले जैसी ही पड़ी हो बिल्कुल जवान। तो मम्मी बोली के कहाँ अब तो बूढ़ी हो गई हूँ। फिर दाई बोली के मेरा तो मर्द जल्दी ही मर गया और फिर घर की जिम्मेदारी आ गई तो बस फिर तब से अब कुछ आराम मिला हैं। लड़के ने घर संभाल लिया हैं तो कुछ चैन मिला हैं। फिर मम्मी बोली के मर्द तो बाहर जाकर और किसी से मजे कर लेते हैं और हम जैसी घर का काम करती ही रह जाती हैं। दाई बोली के मर्द तो औरत को ऐसी नजर से ही देखते हैं।
फिर हम बातें ही कर रहे थे के पापा आ गए तो मैं और दाई अंदर कमरे में चले गए और मम्मी चाय बनाने चली गई। फिर मैं और दाई कमरे में बैठे थे तो उनके वो मैगज़ीन हाथ लग गई और वो उन्हें देखने लगी। फिर मैं उन्हें बताने लगी के बाहर के देशों में लोग ऐसे रहते हैं। फिर उसमें आदमी और औरत की नंगी फ़ोटो देखकर दाई तो देखती ही रह गई। उनमे आदमी का लंड बड़े बड़े थे तो दाई तो अपनी चूत सहलाने लगी। फिर मम्मी आ गई और फिर हम चाय पीने लगे। फिर शाम का टाइम हो गया था तो मैं और दाई नंगी ही आँगन में सोई थी और मम्मी काम कर रही थी। फिर मैं जानबूझकर दाई की चूत सहलाने लगी। फिर एक उंगली अंदर डाल दी तो दाई थोड़ी उछली पर मैंने उंगली नहीं निकाली और फिर अंदर बाहर करने लगी तो दाई को भी मजा आने लगा और वो झड़ गई तो शांत हो गई। फिर हम दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराई। दाई मुझे नहलाती और मेरी और मेरी मम्मी की ऑइल मसाज करती तो दाई ने हम दोनों के गाँड के होल देखे तो बोली के तुम दोनों यहाँ भी करवाती हो क्या। तब मम्मी बोली के आजकल के मर्द सब जगह करते हैं फिर मम्मी मेरी तरफ देखकर हँसने लगी। दाई हम लोगों के साथ काफी घुलमिल गई थी तो मम्मी एक बार दाई के ऊपर आ गई और उसके बूब चूसने लगी। फिर मम्मी ने दाई की चूत पर अपनी चूत रखकर रगड़ने लगी और मम्मी ऐसे धक्के लगाने लगी जैसे दाई को चोद रही हो। फिर कुछ देर बाद दोनों झड़ जाती। फिर ऐसा वो रोज ही करने लगी थी। दाई और मम्मी भी फिर बातें करती तो चुदाई जैसा शब्द भी बोलने लगी थी।
अगले भाग में बताऊंगी के मेरी डिलीवरी कैसे हुई....
मेरी डिलीवरी
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